Thursday, 7 December 2017

टीवीएस ने टीवीएस अपाचे आरआर 310 लॉन्च की | TVS Apache RR 310 launched | Specifications | Price

TVS Apache RR 310 launched
टीवीएस ने टीवीएस अपाचे आरआर 310 लॉन्च की।

टीवीएस ने अपनी पहली 300 सीसी स्पोर्ट बाइक, अपाचे आरआर 310, 2.05 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर लॉन्च कर दी है। खास होने के नाते, इस नई बाइक को बाइकिंग के प्रति उत्साह बनाए रखने के लिए स्टाइलिंग और तकनीकी विशेषताओं के साथ आती है। फैयरिंग साइड पैनल में बाइक को तेज और कोणीय रेखाएं पंख और गिल-प्रकार के विवरण दिए गए हैं। टीवीएस ने तेजी से सेवा को सक्षम करने वाले फेयरिंग असेंबली के लिए क्लिप प्रकार फास्टनरों का उपयोग किया है पीछे के नंबर प्लेट होल्डर  को भी ट्रैक उपयोग के लिए आसानी से हटाया जा सकता है। इसके साथ ही फ्रंट फेयरिंग में रियर व्यू मिरर रखा गया है जो सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास दृश्यता वादा करता है।


इसमें दो हेडलेम्प सेटअप एलईडी प्रकाश वाले प्रोजेक्टर के साथ 30 से कम वाटों का उपभोग करने का दावा करती है, फिर भी अच्छे प्रकाश के करीब रोशनी प्रदान करती है दोनों रोशनी उच्च और निम्न बीम स्थितियों में रहती हैं। टेललेम्प और टर्न इंडिकेटर में भी एलईडी लाइट का इस्तेमाल किआ गया हैं।पूरी तरह से डिजिटल उपकरण क्लस्टर में एक ऊर्ध्वाधर लेआउट है और साथ ही यह डी रेगेयर जानकारी के साथ-साथ इंजन के तापमान और गियर की स्थिति भी दिखाएगा। बाइक पर खतरे के संकेतक एक और क्लास-पहले हैं।


बॉडी वर्क को इंजन से गर्म हवा को सीधे सवारी से दूर और दूर करने के लिए अनुकूलित किया गया है। टीवीएस का दावा है कि मोटरसाइकिल में सबसे अच्छा ड्रैग गुणांक है जो इसे 163 कि.मी. की ऊपरी गति तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।



इसमें 312.2 सीसी तरल-कूल्ड एकल  इंजिन  है , बीएमडब्लू जी 310 आर से उधार लिया गया है , सामने में सेवन के साथ एक अनूठा लेआउट है और पीछे में निकास है। पावर आउटपुट 34 पर्स 9,700 आरपीएम है, जबकि टोक़ 277 एनएम पर 7,700 आरपीएम पर है। एक 16 9 .5 किलोग्राम कटौती वजन और एक छोटे अनुपात गियरबॉक्स के साथ, अपाचे आरआर 310 एकल-सिलेंडर 300 सीसी क्लास में 2.93 सेकंड के तेज त्वरण का दावा करता है। यह भी सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास इन-गियर एक्सलरेशन का वादा करता है।


ब्रेकिंग एक 300mm फ्रंट पंखुड़ी डिस्क के सौजन्य से है, रेडियल एक ट्विन पिस्टन कैलीपर और 240 मिमी रियर डिस्क के लिए clamped। बाइक को कॉन्टिनेंटल से दोहरी चैनल एबीएस भी मिलता है। टीवीएस अपाचे आरआर 310 के लिए सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास ब्रेकिंग का दावा करता है।


टीवीएस केवल आरआर 310 की शुरूआत नहीं कर रही है, बल्कि अपाचे इसमें अनुभव भी शामिल कर  रही है जिसमें रेसिंग अनुभव शामिल है, जो एक चैम्पियन बनाती हैं। 


अपाचे आरआर 310 ने बहुत कुछ वादा  दिया है  और 2.05 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) के मूल्य का ब्योरा दिया, यह भी अच्छा मूल्य है। बात करे इसके  प्रतिस्पर्धा की तो  KTM आरसी 390 , कावासाकी निन्जा 300 और बेनेली 302 आर के रूप में आती  है ।

Google assistant सहायक पाने वाला जिओफोन पहला फीचर फोन होगा

Google Assistant सहायक पाने वाला जिओफोन पहला फीचर फोन होगा। 
JioPhone will be the first feature phone to get Google Assistant


Google ने अपने Google for India 2017 के इवेंट  में घोषणा की है कि रिलायंस जियो द्वारा बनाया गया जिओफोन  Google Assistent फोन सुविधा वाला पहला फोन होगा जो कि Google सहायक को चलाने में सक्षम होगा लगभग सभी आधुनिक स्मार्टफोन्स के लिए उपलब्ध होने के बाद, जो कि एंड्रॉइड और आईओएस पर चलते हैं, Google भारत में लाखों फीचर फोन तक पहुंचना चाहता है, और जीओफोन इस दिशा में पहला फोन होगा।


जिओफोन पर Google सहायक क्या क्या कर सकता है?

JioPhone KaiOS
पर चलता है, जो एक कस्टम ऑपरेटिंग फ़ायरफ़ॉक्स ओएस पर आधारित प्रणाली है। फोन Google Assistant को चलाने में सक्षम होगा, जिससे यह फ़ोन वह सब कुछ कर सकेगा  जो यह एंड्रॉइड और आईओएस पर कर सकता है। यह घोषणा की गई थी कि वह अंग्रेजी, साथ ही हिंदी में वॉयस कमांड के जरिए सवालों के जवाब, संगीत और वीडियो (मेमोरी कार्ड पर संग्रहीत), कॉल करने, और पाठ भेजने में सक्षम होंगे। इस फीचर के रोलआउट समय सीमा की घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन अगले कुछ हफ्तों में रोलआउट शुरू होना संभव है।



जियो फोन रिलायंस जियो का एक फीचर फोन है, जो देश के नवीनतम और सबसे लोकप्रिय सेलुलर ऑपरेटर में से एक है। यह 4 जी एलटीई सक्षम फोन है जिसमें 2.4 इंच के गैर-टचस्क्रीन डिस्प्ले वाला 320 x 240 पिक्सल के साथ आती  है। यह 1.2 गीगाहर्ट्ज ड्यूल-कोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 205 प्रोसेसर, 512 एमबी रैम, 4 जीबी स्टोरेज, एक माइक्रो एसडी कार्ड स्लॉट, वाई-फाई, एनएफसी, और 2000 एमएएच बैटरी का उपयोग करता है। इसमें फेसबुक और यूट्यूब ऐप के साथ-साथ जियो के ऐप भी शामिल हैं, जिनमें जिओ सिनेमा, जियो मैजिक, जॉयोटिव, और जियो एक्सप्रेस न्यूज शामिल हैं।



जिओफोन के लिए Google सहायक रोलआउट सुविधा फोन सेगमेंट में अपनी प्रविष्टि को चिह्नित करेगा, और कंपनी पहले से ही एक बड़ी रिलीज के लिए नोकिया जैसे अन्य ब्रांडों के साथ काम कर सकती है, लेकिन यह सिर्फ हमारी धारणा है भारतीय मोबाइल फोन के बाजार में 500 मिलियन से अधिक फीचर फोन हैं, और Google अपने कृत्रिम इंटेलिजेंस-युक्त डिजिटल वॉयस सहायक के साथ उन तक पहुंचना चाहता है।


Google सहायक संगत अन्य डिवाइसेस


Google सहायक लगभग एंड्रॉइड 6.0 और ऊपर चलने वाले लगभग सभी एंड्रॉइड स्मार्टफ़ोन पर उपलब्ध है। यह एंड्रॉइड वेयर 2.0-आधारित स्मार्टवाचें और आईओएस-आधारित स्मार्टफोन के लिए भी उपलब्ध है। Google सहायक चलाने वाले कुछ अन्य डिवाइस में Google होम , Google होम मिनी, Google होम मैक्स , Google पिक्सेलबुक , एनवीडिया शील्ड टीवी , एंड्रॉइड टीवी-आधारित टेलिविज़न सेट , बोस क्यूसी 35 द्वितीय हेडफ़ोन, जेबीएल लिंक, सोनोसवन और अधिक शामिल हैं।

Thursday, 23 November 2017

अनोखी गाड़ियों की अनोखी चाबियाँ !!

"अनोखी गाड़ियों की अनोखी चाबियाँ !!"

"Incridible Cars with Incrideble keys"

दोस्तों लक्सरी गाड़िया काफी खास होती है और बहुत मेहेंगी भी आती है। तो दोस्तों इन गाड़ियों में ऐसा क्या खास होता है जो इन्हे लक्सरी बनाता है। अगर बात करें इनकी खासियतों की तो इनमे बहुत साडी खासियतें होती है फिर चाहें वो इनका इंजिन हो या इनके टायर्स या इनके दरवाजे या इनका डिज़ाइन। उन्ही कुछ  में से एक खासियत के बारे में हम आपको बताने जा रहे है। दोस्तों गाड़ी जितनी मेहेंगी होती है उसकी सुरक्षा  उतनी ही जरुरी हो जाती है।  तो इन गाड़ियों की सुरक्षा के लिए इनके दरवाजों के लॉक कुछ खास बनाये जाते है।  जो सिर्फ कुछ खास चाबियों से  खुलते है।  तो आप भी देखिये अनोखी गाड़ियों की अनोखी चाबियाँ।


1.) जैगुआर ऍफ़-पेस: - जैगुआर ऍफ़-पेस की चाबी काफी अनोखी है। इसकी चाबी उन लोगो को  ध्यान में रख के बनायी गई है जो अपने हाथों में  चाबी रखना पसंद नहीं करते है या जो लोग अपनी चाबी  रख के भूल जाते है। इन्होंने अपनी गाड़ी की चाबी को बैंड का रूप दिया है जिसे आप अपने हाथो में पेहन सकते है। और यह चाबी वाटरप्रूफ होती है  जिससे आप गाड़ी को लॉक या अनलॉक  कर सकते है। 



2.) कोईनैसेगगम शील्ड :- इस गाड़ी की चाबी भी काफी अनोखी होती है आखिर हो भी क्यू ना। ये गाड़िया साल में मात्र  20 ही बनती है। और एक गाड़ी की कीमत 6 करोड़ के आस पास होती है। इस गाड़ी की चाबी शील्ड के आकार की होती है। जिसमे मेन चाबी शील्ड के आकार के कवर  होती है। जो आपको शाही फील देता है। इस चाबी की मदद से आप गाड़ी को लॉक या अनलॉक  कर सकते है। 

3.) टेस्ला मॉडल एस :- इस गाड़ी की चाबी इस गाड़ी की तरह ही है। अमेरिका की इलेक्ट्रिक कार कम्पनी  टेस्ला ने अपनी एस  मॉडल की गाड़ी की चाबी को इस गाड़ी के रूप में ही बनाया है। आप इस चाबी की मदद से गाड़ी न सिर्फ लॉक और अनलॉक कर सकते है साथ ही आप इस चाबी की रिमोट डिस्टेंस तकनीक की मदद से आप गाड़ी को आगे पीछे भी कर सकते है। 




4 .) बी एम् डब्ल्यू  BMW 7 सीरीज :- इस गाड़ी की चाबी ब्लूटूथ से लेस है। इस गाड़ी की चाबी में डिजिटल टच स्क्रीन फीचर दिया गया है। और इस गाड़ी की चाबी में चार बटन दिए गए  है।  गाड़ी को लॉक और अनलॉक तो करते ही है साथ में साथ ही ट्रंक को खोलने तथा पेनिक में काम आता है।  इसमें 2.5 इंच का टच स्क्रीन डिस्प्ले दिया गया है  जिसमे आप क्लाइमेट कंट्रोल फीचर का फायदा उठा सकते है। 



Saturday, 28 October 2017

व्हाट्सएप्प लाया नया फीचर गलती से सेंड हुए मैसेज, फोटो, वीडियो डीलिट करने की सुविधा

वाट्स एप यूं तो सिंपल मैसेज सर्विस के विकल्प के रूप में शुरू हुआ था और इसने मोबाइल सर्विस प्रदाता कंपनियों की मैसेज सेवा को लगभग खत्म भी कर दिया लेकिन कुछ नए फीचर्स आ जाने के बाद अब वाट्स एप मैसेज सेवा से कुछ ज्यादा हो गया है। लगभग हर यूजर को यह जरूरत महसूस हो रही थी कि वो गलती से सेंड हो गए फोटो, वीडियो या मैसेज को डीलिट कर सके। कई वाट्स एप ग्रुपों में इस तरह की घटनाएं पुलिस तक पहुंच जातीं है। बड़े विवाद शुरू हो जाते है। अत: इसी समस्या का समधान खोज लिया है।



इसे ‘डीलिट फॉर एवरीवन’ नाम से जाता है। वाबीटाइन्फो नाम की एक वेबसाइट के अनुसार वाट्स एप ने आईओएस, एन्ड्रायड और विन्डो फोन में इस फीचर से जुड़ा अपडेट मिलना शुरू हो गया है। इस सुविधा के पूरी तरह से आने में थोड़ा समय लग सकता है। इसके लिए संदेश भेजने और प्राप्त करने वाले दोनों के पास इस फीचर अपडेट वाला वट्स एप होना चाहिए। 


इसमें केवल संदेश ही नहीं जिफ, इमेज, वॉयस मैसेज, लोकेशन, स्टीकर्स और कॉन्टैक्ट मैसेज को भी वापिस लिया जा सकता है। ब्रॉडकॉस्ट लिस्ट को भेजे गए संदेश और जिन संदेशों को भेजे 7 मिनट से ज्यादा हो गया है, उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता।

ऐसे करें व्हाट्सऐप का रीकॉल फीचर इस्तेमाल

सबसे पहले अपने व्हाट्सऐप ऐप को अपडेट करें। इसके बाद टेस्टिंग के लिए अपने किसी फ्रेंड को एक मैसेज भेजें और फिर उसे डिलीट कर दें। हालांकि मैसेज डिलीट करते समय आपको 3 ऑप्श मिलेंगे।

1. DELETE FOR ME. 
2. CANCEL. 
3. DELETE FOR EVERYONE ।

डिलीट फॉर मी पर क्लिक करने पर आपके ऐप से मैसेज डिलीट होगा लेकिन आपके दोस्त के ऐप से नहीं, ‘Delete for Everyone’ पर क्लिक करने पर आपके और दोस्त के दोनों ऐप से मैसेज डिलीट हो जाएगा। मैसेज डिलीट होने के बाद This message was deleted for everyone दिखेगा।


अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी हो तो अपने दोस्तो के साथ शेयर करना ना भूले!!!! और अगर आपका है कोई सबाल या सुझाव तो हमे नीचे कमेंट करें। और अधिक जानकारी के लिये हमारा फेसबुक पेज लाइक करे।आप अगली पोस्ट किस चीज पर जानना चाहते है हमे कमेंट कर के बताइये।


Wednesday, 25 October 2017

दुनिया की पहली स्‍मार्ट ट्रेन : चीन में चलाई गई बिना पटरी वाली रेल ("Worlds first smart train runs in CHINA")


"दुनिया की पहली स्‍मार्ट ट्रेन"


"Worlds first smart TRAIN"


चीन ने दुनिया को पहली स्‍मार्ट ट्रेन का तोहफा दिया है। ये रेलगाड़ी वर्चुअल रेल लाइन पर रन करेगी । इन लाइन्‍स को चाइना की सड़कों पर बिछाया गया है। चीन के झूजो प्रांत में इसे तैयार किया गया है।

   


  • ये ट्रेन एक बार में 300 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी। ट्रेन की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। ट्रेन में तीन कोच तैयार किए गए हैं। इन्‍हें आपस में मेट्रो की तरह जोड़ा गया है। जिससे स्‍मार्ट ट्रेन के अंदर भी यात्री एक कोच से दूसरे कोच में जा सकते हैं।
  • ये स्‍मार्ट ट्रेन फ्यूचर का ट्रांसपोर्ट है। इस ट्रेन सिस्‍टम को शहर के लिए तैयार किया गया है। इसे ऑटोनोमस रेल रैपिड ट्रांसिट कहते हैं। इसे चीन रेल कार्पोरेशन ने तैयार किया है। यह दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेन कंपनी है। 
  • चीन के झूजो प्रांत में 4 मिलियन लोग रहते हैं। सभी को चीन के दूसरे शहरों में भी जाना होता है। ये ट्रेन उनके सफर को और भी आसान बनाएगी। इसे अगर लॉन्‍ग बस कहा जाए तो गलत नहीं होगी पर एक बस के मुकाबले ये कई अधिक संख्‍या में यात्रियों को ले जा सकती है।
  • इस ट्रेन की सबसे खास बात है इसके चलने का तरीका जो पुराने तरीको से हटकर है। इसे चलने के लिए किसी भी तरह का फिजिकल ट्रैक नहीं चाहिए। इस खास ट्रेन के लिए खास तौर पर रोड पर डॉट के रूप में अद्रश्‍य लाइनों को तैयार किया गया है।
  • एक किलोमीटर की कॉस्‍ट 17 से 23 मिलियन यूरो है। इस ट्रेन को चलाने के लिए रोड के अंदर सेंसर फिट किए जाते हैं। ये सेंसर ट्रैवल की जानकारी एकत्र करने में भी सक्षम होते हैं।

आइये हम आपको दिखाते है इस रेलगाड़ी की कुछ तस्वीरें  नीचे देखिये।  


  

  

  

  

  

  


Friday, 13 October 2017

डुकाती दियावेल डीजल भारत में हुई लॉन्च जानिए क्या है कीमत "Ducati diavel launch in INDIA know the price "

"डुकाती दियावेल डीजल भारत में हुई लॉन्च"


"Ducati diavel launch in INDIA"


इटली की दुपहिया वाहन निर्माता कंपनी डुकाती ने डुकाती दियावेल डीजल भारत में पेश कर दिया हैं। वेल श्रेणी के वाहनों को देश में दुबारा लांच किया है। इसकी भारत में एक्स शोरूम कीमत 21 लाख 72 हजार रुपये है। जो हर राज्य के अनुसार बदल सकते है 

  

यह वाहन लिमिटेड एडिशन में पेश किया गया है और दुनिया भर में इसकी 666 इकाइयाँ ही उपलब्ध होंगी। इन्हें कैजुअल वीयर बनाने वाले डीजल लाइसेंभसग ब्रांड के क्रिएटिव डायरेक्टर एंड्रिया रोसो के सहयोग से इटली के दुकाती डिजाइन सेंटर में डिजाइन किया गया है।

डुकाती दियावेल डीजल का इंजन 152 एचपी वाला टेस्टास्ट्रेटा 11 डिग्री डीएस है। इसके फीचरों में एबीएस और दुकाती ट्रैक्शन कंट्रोल हैं। इसका पिछला पहिया 240 मिलि मीटर चौड़ा है। यह दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद, कोच्ची और कोलकाता में कंपनी के डीलरों के पास उपलब्ध है।

बाइक की स्पेसिफिकेशन जानने  नीचे पढ़े।




"डुकाती दियावेल डीजल" की कुछ खास बातें "

"some special sp[ecifications of "Ducati diavel diesel"

  • डुकाती दियावेल में 1198.4 सीसी का एल-ट्विन लिक्विड कूल्ड इंजन लगा हुआ है, जो 6-स्पीड ट्रांसमिशन से जुड़ा हुआ है।
  • डुकाती दियावेल का एग्जॉस्ट भी देखने में काफी शानदार लगता है। इसमें एल्युमिनियम टिप्स के साथ स्टेनलेस स्टील का मफलर लगाया गया है।
  • बाइक में न्यूट्रल, टर्न सिग्नल्स, हाई-बीम, डीटीसी इंटरवेंशन, एबीएस स्टेटस, ऑइल प्रेशर आदि के लिए वॉर्निंग लाइट्स भी लगी हैं।
  • बाइक में ट्यूब्युलर स्टील ट्रेलिस फ्रेम है जो काफी मजबूत है। इसके अलावा इस मोटरसाइकल के सस्पेंशन्स भी कमाल के हैं। इसका रियर सस्पेंशन फुली अजस्टेबल है।
  • बाइक के हैंडलबार में एलसीडी डिस्प्ले लगा है जिसके जरिए आप स्पीड, आरपीएम, टाइम, कूलैंट टेंपरेचर आदि पर नजर रख सकते हैं।
  • डुकाती दियावेल का कुल वजन लगगभ 240 किग्रा के आसपास है। इस बाइक की हैंडलिंग भी शानदार है।
  • डुकाती दियावेल के फ्रंट और रियर वील्स लाइटवेट अलॉय के बने हैं और 14-स्पोक के साथ आते हैं।
  • बाइक की सीट जमीन से 30.3 इंच की ऊंचाई पर है। इसका वीलबेस लगभग 62 इंच है।
  • यह बाइक आपको शानदार राइडिंग एक्सपीरियंस देने में सक्षम है। दुकाती डायवल 24 महीने की वॉरंटी के साथ आती है।
  • डुकाती दियावेल की कीमत लगभग 38 लाख रुपये (दिल्ली, एक्स-शोरूम) है।
  


                           

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Monday, 9 October 2017

सड़क किनारे लगे मील के पत्थरों के रंगों का मतलब क्या होता हैं? (What is the meaning of diffrent colour "MILES STONES"" )



सड़क किनारे लगे मील के पत्थरों के रंगों का मतलब क्या होता हैं



What is the meaning of diffrent colour "MILES STONES" along side roads"


हम सभी घर के बाहर डेस्टिनेशन या टूर पर निकलते है, तो हमे रास्ता दिखाने का काम कोई अगर करता है तो वो होते है सड़क के किनारे लगे साइन बोर्ड और मिले के पत्थर।ये मील के पत्थर हमे हमारी मंजिल के पते के साथ ही ये भी बताते है कि हमारी मंजिल कितनी दूर है। लेकिन आपको आपकी मंजिल पर ले जाने वाले पथरो पर शायद ही आपने कभी गौर किया होगा। कोई मील का पत्थर पीले रंग का होता है तो कोई हरा तो कोई काला तो कोई लाल लेकिन इन पथरो का रंग अलग अलग क्यों होता है?  दरअसल इन पथरो के रंग के पीछे सबकी अपनी एक पहचान होती है। अब अगर आप सफर पर निकलेंगे तो आप इन पत्थरो पर गौर करेंगे और आपको करना भी चाहिये क्योकि ये पत्थर सिर्फ आपको आपकी दुरी ही नहीं बताते बल्कि इनके रंग आपको सड़को की खास पहचान भी करवाते है ।



तो आइये जानते है

"मील के पत्थरों के रंगों का मतलब "


meaning of diffrent colour "MILES STONES"

नारंगी पत्थर :- अगर आप सफर कर रहे है और रास्ता भटक जाये जाना आपको शहर हो  लेकिन आप जान नहीं पा रहे हो कि आप किस तरफ जा रहे है तो आप सड़क के किनारे लगे इन पत्थरो पर नजर डालिये और आपको नारंगी रंग का पत्थर दिखाई दे तो आप समझिये के आप किसी गाँव की और बढ़ रहे है क्यों की  इस रंग के पत्थर सिर्फ ग्रामीण सड़क पर होते है और इसका मतलब ये है के आप प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से बानी सड़क  कर रहे हो जो आपको गाँव तक ले जाएगी। 

  

हरा पत्थर :- अगर आपको हरे रंग का पत्थर दिखाई देता है तो आप जान सकते है के आप किसी स्टेट हाईवे से सफर कर रहे है। जो एक राज्य को दूसरे राज्य से जोड़ती है। इस सड़क का निर्माण राज्य सरकार  करती है। इस सड़क के रख रखाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। 

  




पीला पत्थर :- अगर आपको पीले रंग का पत्थर दिखाई देता है तो आप जान सकते है के आप किसी राष्ट्रीय राज मार्ग से सफर कर रहे है। ये पत्थर केंद्र सरकार के द्वारा बनाई गई सड़को पर होते है। इस सड़क का निर्माण  केंद्र सरकार करती है। इस सड़क के रख रखाव की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है। 

  

काले पत्थर :- काले रंग के पत्थर आपको बड़े शहरो में ही देखने को मिलते है। दिल्ली, मुंबई, गुड़गाव, फरीदाबाद, नॉएडा, आदि शहर इनमे शामिल है। इस रंग के पत्थर ये बताते है कि आप किसी बड़े शहर की ओर बड़ रहे है। इस रंग की सड़के शहर के प्रशासन के अंदर आती है। नगर निगम या जिला प्रशासन इन सड़को का निर्माण करता है। कई जगह पर सफ़ेद रंग के पत्थर भी होते है इन सफ़ेद रंग के पत्थरो का मतलब भी यही होता है जो काले रंग के पत्थरो का मतलब होता है। अगर ये सड़के ख़राब होती है तो आप इसकी शिकायत नगर निगम में कर सकते है। 

  



  


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Saturday, 7 October 2017

भारत में मोबाइल नंबर 10 डिजिट्स के क्यों होते है? 8 या 9 क्यों नहीं !! ("Check out why mobile numbers in INDIA have 10 DIGITS !! WHY NOT 8 OR 9") !!

हमारे पास 10 अंकों वाले मोबाइल नंबर क्यों हैं? शायद यह हम में से सबसे ज्यादातर लोग वास्तव में इसके बारे में सोचते होंगे। लेकिन इसके पीछे इसका बहुत ही अच्छा तर्क है।




तर्क: मोबाइल फोन नंबर में अंकों की संख्या, देश कोड को डायल किए बिना अधिकतम मोबाइल फोन तय कर सकती है। 91 (भारत के लिए) इसे समझने के लिए हमें स्कूल में वापस जाना होगा। क्रमपरिवर्तन और संयोजन याद रखें मान लीजिए मेरे पास जींस (जे 1-2) और चार टी-शर्ट (टी 1-4) । संभव संयोजन हैं: जे 1 टी 1, जे 1 टी 2, जे 1 टी 3, जे 1 टी 4, जे 2 टी 1, जे 2 टी 2, जे 2 टी 3, और जे 2 टी 4, अर्थात् 8 संयोजन (2 जीन्स की संख्या) x (4 टी-शर्ट की संख्या)}।

एक मोबाइल फोन नंबर में या किसी भी संख्या वाली चीज जैसे कि वाहन, भूमि-रेखा टेलीफोन नंबर आदि के लिए अंकों की गणना करते समय एक ही तर्क का उपयोग किया जाता है। अब मानिए कि अगर हमारे पास 6 अंक का फोन नंबर होता , तो अधिकतम संख्या संभवतः फ़ोन संख्या (10 x 10 x 10 x 10 x 10 x 10) होनी चाहिए, यानी अधिकतम 1,000,000 सदस्य लेकिन हमने पहले ही भारत में 100 मिलियन अंक पार कर लिए हैं। इसलिए जाहिर है कि हमारे पास 6 अंकों के सेल फोन नंबर नहीं हो सकते । यहां तक ​​कि 7 अंकों का भी नहीं, क्योंकि इसकी वजह से 10 मिलियन की क्षमता होती है, 8 अंकों से 100 मिलियन उपभोक्ताओं की , 9 अंकों से 1000 मिलियन यानी  100 करोड़, लेकिन हमारी आबादी करीब 125 करोड़ है और इसके बाद भी हमारी आबादी दिन प्रतिदिन बढ़ रही  है।


एक 10 अंकों का सेल फ़ोन नंबर हमें 10 अरब (1000 करोड़) के ग्राहकों की क्षमता प्रदान करता है, जो कि हमारे देश के लिए काफी रह सकता है। हम जनसंख्या में 1000 करोड़ ग्राहक तक पहुंचेंगे ये संभावना नहीं हैं लेकिन हमारे पास 100 करोड़ ग्राहकों से अधिक होंगे  इसकी एक रिमोट संभावना है। इसलिए, एक 10 अंकों वाला मोबाइल फोन नंबर भारत में इस्तेमाल किया जाता है।

  
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Monday, 25 September 2017

न्यूज़ पेपर में चार डॉट्स क्यो छपे होते है पता करे जो आप न्यूज़पेपर में देखते हैं ("know the hidden secret behind the four dots that you see in Newspaper" !!)



न्यूज़ पेपर में चार डॉट्स क्यो छपे होते है पता करे जो आप न्यूज़पेपर में देखते हैं

"know the hidden secret behind the four dots that you see in Newspaper"


एक फोटो की छपाई करते समय उस फोटो मे एक से अधिक रंग होते हैं, प्रत्येक रंग अलग से प्रिंट करना आवश्यक होता है और प्रत्येक रंग दूसरों के साथ ठीक से ओवरलैप हुआ है यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होता है ,अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो छपी हुई फोटो फजी, धुंधली या "रजिस्टर से बाहर" दिखाई देगी । रंगों को सही ढंग से एक लाइन मे छपाई में मदद करने के लिए, पंजीकरण की एक प्रणाली आवश्यक होती है।




चार बिंदुओं नीले (सियान), गुलाबी (मेजेन्टा), पीले और काले रंग के बिंदु प्रिंटिंग के दौरान उपयोग किए जाने वाले पंजीकरण के निशान हैं, ताकि यह सुनिश्चित करने में सहायता मिल सके कि प्रिंट ठीक से  किया गया है। ऑफ़सेट प्रिंटिंग तकनीक में, जो समाचार पत्रों की छपाई में उपयोग करते हैं, इनकोड छवि को एक प्लेट से रबर कंबल तक स्थानांतरित किया जाता है, फिर उस रबर कंबल से फोटो की छपाई की जाती है। ये प्राथमिक रंग बहु-रंग की फोटो को छापने मे इस्तेमाल करते हैं और ये छपाई प्लेटों की मदद से होती हैं और ये प्लेटे अलग अलग रंग की होती है। प्रत्येक प्लेट का अपना व्यक्तिगत चिह्न होता है। समाचार पत्रों मे बने अलग अलग रंगो के ये निशान ये र्दशाते है कि छपाई मे कितने रंग की प्लेटो का इस्तेमाल किया  गया है।  


                                                       


नीले (सियान) रंग के बिंदु का मतलब है कि इस समाचार पत्र की छपाई मे नीले (सियान) रंग की प्लेट का इस्तेमाल किया  गया है।



गुलाबी (मेजेन्टा) रंग के बिंदु का मतलब है कि इस समाचार पत्र की छपाई मे गुलाबी (मेजेन्टा) रंग की प्लेट का इस्तेमाल किया  गया है।




पीले रंग के बिंदु का मतलब है कि इस समाचार पत्र की छपाई मे पीले रंग की प्लेट का इस्तेमाल किया  गया है।




काले रंग के बिंदु का मतलब है कि इस समाचार पत्र की छपाई मे काले रंग की प्लेट का इस्तेमाल किया  गया है।



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Saturday, 23 September 2017

जानिये भारतीय रेल के जंक्शन, सेंट्रल, टर्मिनल और स्टेशन के बीच में क्या अंतर है!!("Difference Between Junction,Central,Terminal AND Station OF INDIAN RAILWAYS"" )


"भारतीय रेल के जंक्शन, सेंट्रल, टर्मिनल और स्टेशन के बीच में क्या अंतर है"
"DIFFERENCE BETWEEN JUNCTION,CENTRAL,TERMINAL AND STATION OF INDIAN RAILWAYS"

भारतीय रेलवे, जो रेल मंत्रालय के तहत भारत सरकार द्वारा संचालित है, केवल देश में रेल परिवहन के लिए जिम्मेदार है। इसे दुनिया के चौथे सबसे बड़े रेल नेटवर्क के रूप में माना जाता है, जिसमें 92,081 किलोमीटर चलने वाला ट्रैक है और इसमें 66,687 किमी की दूरी है। अकेले 2015-16 में भारतीय रेल ने 8.107 अरब यात्रियों को सफर कराया है।



 


यहां लगभग 22 मिलियन यात्री हर दिन सफर करते है। रेल यात्रा आरामदायक बनाने के लिए, देश के विभिन्न हिस्सों में 7216 स्टेशन बनाए गए हैं। स्टेशनों के नामों में अंतर है, जैसे कुछ का नाम जंक्शन है, कुछ टर्मिनस के रूप में और कुछ का नाम सेन्ट्रल है तो क्या आपने कभी सोचा है कि जंक्शन, टर्मिनस, सेन्ट्रल और एक रेलवे स्टेशन के बीच अंतर क्या है?

जवाब यहां दिया गया है


"रेलवे स्टेशनों को मुख्य रूप से 4 प्रकारों में बांटा गया है।"

"Railway stations are mainly differentiated into 4 types."




1. टर्मिनस "Terminus":-
एक स्टेशन टर्मिनस / टर्मिनल के रूप में जाना जाता है जब ट्रेन केवल एक दिशा में स्टेशन के अन्दर आ या जा सकती है। दूसरे शब्दों में, ट्रैक दूसरे दिशा में समाप्त होता है। एक ट्रेन को उसी दिशा में छोड़ना होगा जैसे वह अन्दर आयी थी। टर्मिनस के कुछ उदाहरण हैं: छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी), लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी)।

  


2. सेन्ट्रल "Central":-
एक शहर में सबसे व्यस्त और सबसे महत्वपूर्ण सेन्ट्रल स्टेशन है, जिसमें कई स्टेशन हैं यह बड़ी संख्या में आगमन और प्रस्थान के साथ संबंधित है। ये सबसे पुराने स्टेशन हो सकते हैं, इसलिए उन्हें सेन्ट्रल कहा जाता है। यदि एक शहर में कई स्टेशन हैं तो यह एक सेन्ट्रल होना आवश्यक नहीं है भारत में 5 सेन्ट्रल स्टेशन हैं: मुंबई सेंट्रल (बीसीटी), चेन्नई सेंट्रल (एमएएस), त्रिवेंद्रम सेंट्रल (टीवीसी), मैंगलोर सेंट्रल (एमएक्यू), कानपुर सेंट्रल (सीएनबी)।


  


3. जंक्शन "Junction":-
यदि कम से कम 3 अलग-अलग रूट चल रहे हैं और स्टेशन से बाहर जा रहे हैं, तो इसे एक जंक्शन कहा जाता है। सरल शब्दों में, स्टेशन में प्रवेश करने वाली ट्रेनों में स्टेशन छोड़ने के लिए कम से कम 2 अलग-अलग रूट होने चाहिए। जंक्शन के कुछ उदाहरण हैं: मथुरा जंक्शन (7 मार्ग), सेलम जंक्शन (6 मार्ग), विजयवाडा जंक्शन (5 मार्ग), बरेली जंक्शन 5 मार्ग)।

 


4. स्टेशन "station":- एक स्टेशन बस एक जगह है जहां यात्रियों / सामानों के लिए एक गाड़ी रोकी जाती है और सवारी ट्रेन में प्रवेश करती है और प्रस्थान करती है।

  

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7 बाते जिन्हें आप हाइपरलूप ट्रेन के बारे में नहीं जानते होगे ("7 THINGS YOU DID NOT KNOW ABOUT"HYPERLOOP TRAIN"")

"हाइपरलूप ट्रेन"

"HYPERLOOP TRAIN"


2013 में, आधुनिक आयरन मैन एलोन मस्क ने एक उच्च गति परिवहन प्रणाली के लिए अपनी अवधारणा का खुलासा किया जिसमें उन्होंने कॉनकॉर्ड, एक रेलगाउन, और एक एयर हॉकी मेज के बीच एक क्रॉस के रूप में वर्णित किया। "हाइपरलोप" को डब किया गया, यह फ्यूचरिस्टिक ट्रेन सैद्धांतिक रूप से सुपरसोनिक गति पर यात्रियों को सफर कराने में सक्षम होगी।यह ट्रेन जमीन के ऊपर, विशाल ट्यूब्स के अंदर चलेगी। इस ट्रेन को देख कर ऐैसा लगता है जैसे यहआसमान मे तैर रही हो। लेकिन अभी भी हम इस  ट्रेन की प्रगति के मामले मे काफी पीछे है। लेकिन बहुत जल्द यह ट्रेन भारत मे देखने को मिल सकती है।


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"7 बाते जिन्हें आप हाइपरलूप ट्रेन के बारे में नहीं जानते होगे"
"7 THINGS YOU DID NOT KNOW ABOUT"HYPERLOOP TRAIN"


1.यह 1200 किलोमीटर प्रति घंटे पर यात्रा करेगी It will travel at 12000 kmph


जैसा कि रेखांकित किया गया है, हाइपरलूप ध्वनि की गति से तेज़ी से यात्रा करने में सक्षम होगी। इसे परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, एलए से एसएफ़ तक हाइपरलूप पर यात्रा - (शुरू में मस्क द्वारा प्रस्तावित मार्ग) - छह घंटे की ड्राइव की तुलना में सिर्फ 35 मिनट लगेगा।

2. हाइपरलूप आखिर है क्या? What is HYPERLOOOP?

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हाइपरलूप सुरंग में दौड़ने वाला एक कैप्सूल है जो इलेक्ट्रो मैगनेटिक फील्ड पर हवा में तैरता हुआ चलता है, और इसकी रफ्तार है। 1,223 किलोमीटर प्रति घंटा यानी आवाज़ की रफ्तार के करीब।


3. हाइपरलूप से क्या फायदा होगा ?
What is profit of HYPERLOOOP?


अगर हाइपरलूप भारत में दौड़ती है तो ट्रांसपोर्टेशन की तस्वीर ही बदल जाएगी। कई दिनों का थका देने वाला सफर महज घंटों में खत्म हो जाएगा। और आप सुपरसोनिक स्पीड पर आरामदेह सफर का मजा ले सकेंगे। हाइपरलूप ट्रेन के सपना साकार हुआ तो शहरों के बीच की दूरी घटकर मिनटों और घंटों में तब्दील हो जाएगी।
दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी एक हजार चार सौ पंद्रह किलोमीटर है। दिल्ली से ट्रेन के जरिए मुंबई जाने में 22 से 24 घंटे लगते हैं, कार से जाने में 22 से 24 घंटे लगते हैं, अगर हवाई जहाज से जाएं तो 2 घंटे 15 मिनट लगते हैं। लेकिन अगर हाइपरलूप ट्रेन में सवार हुए तो महज 40 मिनट में दिल्ली से मुंबई का सफर पूरा होगा।

4.हाइपरलूप कैसे काम करती है? How HYPERLOOOP works?

हाइपरलूप जमीन पर, जमीन के नीचे और जमीन से ऊपर कहीं भी दौड़ाई जा सकती है। हाइपरलूप ट्रेन पटरियों पर नहीं दौड़ती बल्कि हवा में चलती है। इसमें पहिए भी नहीं है। इसके पीछे लैविटेशन का सिद्धांत काम करता है। ट्रेन बनाने वाली कंपनी का दावा है कि इसमें सफर तेज ही नहीं बल्कि सुरक्षित भी होगा। ये ट्रेन असल में एक कैप्सूल है जो वैक्यूम सुरंगों में दौड़ेगी।

5.हाइपरलूप के अन्दर क्या क्या होगा? What will inside in compartment of HYPERLOOOP?

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आवाज की रफ्तार से बराबरी की कोशिश करने बाली हाइपरलूप का मकसद सिर्फ जबरदस्त रफ़्तार ही नहीं बल्कि आपके सफ़र को एक सुकून भरा अनुभव बनाना भी है। इसके अंदर का माहौल बिल्कुल हवाई जहाज़ जैसा है। सीटें भी हवाई जहाज़ जैसी आरामदायक हैं।इसमें संसाधनों का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है।

6.इसमें आपके विचार से कम लागत आएगी. It will cost less than you think.

इसे चलाने की लागत इतनी कम है कि हवाई किराए के बराबर खर्च करके भी ये हवाई जहाज के सफर से ज्यादा आनंददायक यात्रा होगी। हाइपरलूप पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बगैर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सस्ता बनाने की बेमिसाल कोशिश है।

7.भारत मे हाइपरलूप ट्रेन. "HYPERLOOOP tarin in INDIA"

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भारत में जल्द दौड़ेगी ये ‘सुपर’ ट्रेन, 1,223किमी प्रति घंटा होगी रफ्तार। इस ट्रेन में दो ट्यूब होंगे जिसमें हवा बिल्कुल न के बराबर होगी यानि हवा का दवाब शून्य। ट्रेन के आगे लगा पंखा हवा को पीछे धकेलेगा, ठीक इसी तरह एक पंखा ट्रेन के पीछे भी लगा है जो हवा को चारों ओर फैला देगा। इस तरह ट्रेन के नीचे एयर कुशन बन जाएंगे जिससे लैविटेशन पैदा होगा। ट्रेन बिना किसी ऊर्जा के आसानी से हवा में तैर पाएगी और इसी से ट्रेन को हासिल होगी। इस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम का एक फायदा ये भी होगा कि हादसों में कमी आएगी। क्योंकि निर्माताओं का दावा है कि हाइपरलूप में हादसे की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर निर्माताओं का दावा सही है और भारत में हाइपरलूप दौड़ती है तो आने वाले समय में इंडिया की रफ्तार तो बढ़ेगी ही साथ ही हादसों में कमी भी होगी।

Friday, 22 September 2017

टाटा नेक्सन 5.85 लाख रुपये में लॉन्च हुई ("Tata Nexon launched at Rs 5.85 Lakhs")

टाटा नेक्सन 5.85 लाख रुपये में लॉन्च हुई  ("Tata Nexon launched at Rs 5.85 Lakhs")
"टाटा नेक्सन"

"Tata Nexon"


टाटा मोटर्स ने अपने सबसे प्रत्याशित कॉम्पैक्ट एसयूवी, नेक्सन को देश में पेट्रोल संस्करण के लिए 5.85 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) की परिचयात्मक कीमत पर लॉन्च किया। टाटा नेक्सन को चार पेट्रोल और डीजल वेरिएंट में पेश किया जाएगा, अर्थात - एक्सई (XE), एक्सएम  (XM), एक्सटी (XT) और एक्सज़ + (XZ+), जहां एक्सज़ +  (XZ+) नया संस्करण पेश किया गया है। एसयूवी मारुति सुजुकी विटारा ब्रेज़्ज़ा और होंडा डब्लूआर-वी के साथ प्रतिद्वंद्वी होगी।

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नेक्सन के शीर्ष अंत XZ + ट्रिम को सभी सामानों के साथ पैक किया गया है। जिसमें एक 6.5 इंच के टचस्क्रीन इंफोटेंमेट सिस्टम शामिल है जिसमें एक 8-स्पीकर सिस्टम, रिवर्स कैमरा और जलवायु नियंत्रण के साथ एक फ्लोटिंग डिस्प्ले होगा। यह अंदर से एक तीन-टोन रंग लेआउट के साथ आती है। सुरक्षा सुविधाओं के लिए, कार एबीएस और ईबीडी (इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकफोर्स डिस्ट्रीब्यूशन) के साथ और शीर्ष अंत ट्रिम पर छः एयरबैग के साथ आएगी
तकनीक तौर पर यह कार पेट्रोल और डीजल दोनों संस्करणों में आएगी। 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन में अधिकतम अधिकतम 108 बीएचपी और 170 एनएम के चोटी टोक़ के साथ उत्पादन होगा। दूसरी तरफ, बड़ा 1.5 लीटर डीजल इंजन जो कि अधिकतम 108 बीएचपी का उत्पादन करता है, लेकिन 260 एनएम की एक चोटी टोक़ है। ट्रांसमिशन कर्तव्यों को 6 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन गियरबॉक्स द्वारा किया जाएगा।

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टाटा संभवतः सबसे कम कीमत पर सेगमेंट में अपनी सबसे बेहतरीन सुविधाओं के साथ अपनी कार प्रदान कर रहा है। अपने प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ खड़े होने पर, नेक्सन अपने प्रतिस्पर्धियों में सबसे शक्तिशाली कार है

मूल्य- 5,85,000 ₹ (पेट्रोल)
मूल्य- 6,85,000 ₹ (डीजल)

Friday, 15 September 2017

इंजीनियर दिवस क्या है? What is Engineer's Day ?



इंजीनियर/अभियंता दिवस

Engineer's Day


भारत शुक्रवार को "इंजीनियर/अभियंता दिवस" "सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या" की 156 वीं जयंती को मनाने के लिए मनाएगा, जो कि भारत के महानतम इंजीनियरों में से एक है और भारत में कई प्रतिष्ठित निर्माण के पीछे इन एक व्यक्ति का काफी योगदान है। वर्ष 2017 में भारत में इंजीनियर्स दिवस की 49 वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगा। यह इस तथ्य पर विचार करने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है कि भारत एक वर्ष में लगभग 20 लाख अभियंताओं इंजीनियरो का उत्पादन करता है।

भारत मे "इंजीनियर/अभियंता दिवस" 15 सितम्बर को "सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या" की जयंती को मनाने के लिए मनाया जाता है । आइये जानते है "सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या"  के बारे में !!!!!



 "सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या"
"Sir Mokshagundam Visvesvarayya"

सर विश्वेश्वरय्या जल संसाधनों के उपयोग में अपने मास्टर माइंड के लिए जाने जाने वाले एक मान्यता प्राप्त  अभियंते इंजीनियर थे। उन्होंने सफलतापूर्वक सिंचाई और पीने के पानी की व्यवस्था को लागू करके कई नदी बांध, पुलों और भारत में सिंचाई प्रणाली में क्रांति की।
सर विश्वेश्वरय्या का जन्म 15 सितंबर, 1861 को कर्नाटक के कोलार जिले के मुद्देनहल्ली गांव में श्रीनिवासशास्त्री और वेंकचम्मा को हुआ था। उन्होंने 1881 और 1883 में कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे से सिविल इंजीनियरिंग और बैंगलोर के सेंट्रल कॉलेज  से बी. ए. की पङाइ को पूरा किया।



उन्होंने 1884 में मुंबई (तब बॉम्बे) में लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) के साथ सहायक अभियंता के रूप में अपना कैरियर शुरू किया और बाद में भारतीय सिंचाई आयोग में शामिल होने का अनुरोध किया। एक लोक निर्माण विभाग के अभियंता के रूप में, उन्होंने सार्वजनिक भवनों के निर्माण, सड़क निर्माण और कई महत्वपूर्ण शहरों में शहर के विकास की योजना तैयार करने से संबंधित कई परियोजनाएं पूरी की।

उन्होंने पूर्ण समर्पण और दृढ़ता से काम किया और 1909 में मैसूर राज्य में मुख्य अभियंता के रूप में पदोन्नत रहे।

उनकी उल्लेखनीय प्राप्ति स्वत: पानी की जलप्रवाह प्रणाली थी जिसे पहली बार 1903 में पुणे के पास खडकवासला जलाशय में स्थापित किया गया था, जो उसके द्वारा डिजाइन और पेटेंट कराया गया था। पुणे के माध्यम से बहने वाले मूता नहर के बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए ये द्वार पहली बार इस्तेमाल किए गए थे। मैसूर के कृष्णासगर बांध में ग्वालियर के टाइगरा बांध और अन्य बड़े भंडारण बांधों में इसी तरह के फाटकों का इस्तेमाल किया गया।

वह मुख्य इंजीनियर के रूप मे मंड्या जिले में कृष्ण राजा सागर बांध के निर्माण के लिए स्थापित रहे । वह 1912 से 1919 तक सात साल के लिए मैसूर के रियासत की राजनीतिज्ञ और दीवान भी थे।


1955 में विश्वेश्वराय ने प्रतिष्ठित भारत रत्न प्राप्त किया